गाइड
गाड़ी का लोड: टेम्पो, ट्रैक्टर और ट्रक
Mahindra Jeeto Strong, जो टेम्पो क्लास का लोडर है, अपने बनाने वाले के हिसाब से डीज़ल में 815 किलो पेलोड रखता है, यानी 50 किलो के हिसाब से लगभग 16 बोरी सीमेंट; Bolero Pik-Up अपने 4WD रूप में 1010 किलो ले जाता है, लगभग 20 बोरी; और Jayo क्लास के ट्रक का अपना GVW, इंजन और बॉडी मिलाकर, 4990 किलो तक जाता है, यही साइज़ इस व्यापार में ट्रक कहलाता है, पिकअप नहीं। असल में कौन सी गाड़ी कौन सा माल ले जाएगी यह फोन पर तय होता है, क्योंकि ये छपे हुए आँकड़े उस क्लास के हैं जिसे टेम्पो जैसा शब्द दिखाता है, इस दुकान की अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट के नहीं।
- गाइड
- आंकड़ों की 1 टेबल
- अपनी डिलीवरी, 34 ब्लॉक
- सातों दिन खुला
Jay Shree Infra अपनी डिलीवरी खुद चलाता है, टेम्पो से ट्रैक्टर और ट्रक तक, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के सभी 34 ब्लॉक तक, जितना भी माल हो उतना, उस रूट के बाज़ार भाव पर। दरवाज़े पर असल में कौन सी गाड़ी आएगी यह फोन पर तय होता है; नीचे उन तीन शब्दों में से हर एक किस क्लास को दिखाता है, वह एक बनाने वाले के अपने छपे हुए वज़न में है, ताकि छोटा, मझोला या बड़ा जैसे शब्द के पीछे कोई असली आँकड़ा भी खड़ा रहे।
टेम्पो क्लास का लोडर, वह पिकअप जिसे कोई फैब्रिकेटर छोटा ट्रक भी कह दे, और असली ट्रक, ये एक ही चीज़ के तीन नाप नहीं हैं। हर एक का अपना वज़न रेटिंग है और हर एक की अपनी लंबाई, माल चढ़ने से पहले ही। नीचे के आँकड़े Mahindra के अपने हैं, हर क्लास के एक-एक नाम पर, ताकि काम करने के लिए एक असली नंबर मिले।
वज़न की टेबल
टेम्पो, पिकअप और ट्रक किस हिसाब से रेटेड हैं
तीन क्लास के पाँच नाम की गाड़ियाँ, GVW और पेलोड जैसा उनका बनाने वाला छापता है, और उस पेलोड में 50 किलो के कितने सीमेंट बोरी आते हैं।
सारे कॉलम देखने के लिए टेबल को दाएँ बाएँ स्क्रॉल कीजिए
| क्लास | मॉडल | GVWकिलो, बनाने वाले का अपना आँकड़ा | पेलोडकिलो, छपा हुआ या GVW में से कर्ब वेट घटाकर | 50 किलो सीमेंट बोरीज़्यादा से ज़्यादा, पेलोड से निकाला गया |
|---|---|---|---|---|
| Tempo | Jeeto Strong Diesel | छपा नहीं | 815 | 16 |
| Tempo | Jeeto Strong CNG | छपा नहीं | 750 | 15 |
| Pickup | Bolero Pik-Up 2WD | 2950 | 1280 | 25 |
| Pickup | Bolero Pik-Up 4WD | 2735 | 1010 | 20 |
| Truck | Jayo 2654/HSD | 4990 | छपा नहीं | पेलोड छपा नहीं |
GVW गाड़ी के अपने वज़न और उस पर जो कुछ भी लदे, इंजन, बॉडी और ड्राइवर सब मिलाकर, वह आँकड़ा है; पेलोड वह बचा हुआ हिस्सा है जो गाड़ी का अपना कर्ब वेट निकालने के बाद माल के लिए रहता है। इन पाँच में से दो पर Mahindra सीधे पेलोड छापता है; Bolero Pik-Up 2WD पर सिर्फ GVW और कर्ब वेट छपे हैं, इसलिए यहाँ का 1280 किलो वही घटाव है, कोई दूसरा आँकड़ा नहीं जो Mahindra खुद कहता हो। सीमेंट बोरी वाला कॉलम पेलोड को 50 किलो से भाग देकर नीचे गोल किया गया है, उस 50 किलो के नेट बोरी वज़न पर जो सीमेंट स्टोरेज वाली गाइड में है; यह पेलोड पर हिसाब है, कोई भी बनाने वाला यह आँकड़ा नहीं छापता। इन पाँच में से कोई भी ज़रूरी नहीं कि इसी दुकान की अपनी गाड़ी हो; ये हर क्लास के नामी मॉडल हैं, बनाने वाले के अपने पन्ने से पढ़े गए, ताकि टेम्पो, पिकअप और ट्रक के पीछे कोई असली आँकड़ा खड़ा हो।
इनमें से दो क्लास असल में यहाँ ज़्यादातर माल जिस पर चढ़ता है उसके आस-पास बैठती हैं। Jeeto Strong जैसा टेम्पो क्लास का लोडर सँकरी गली में जल्दी घुस जाता है और उसका अपना कर्ब वेट हल्का है, यही सबसे बड़ी वजह है कि उसका पेलोड एक टन से नीचे रहता है। Bolero क्लास का पिकअप उसे लगभग दुगना कर देता है, और Jayo क्लास के ट्रक का अपना GVW, इंजन और बॉडी मिलाकर, पाँच टन के करीब पहुँच जाता है, इससे पहले कि एक भी बोरी चढ़े।
बोरी की गिनती एक हद है, कोई वादा नहीं। 815 को 50 से भाग देने पर 16.3 आता है, और सिर्फ 16 पूरी बोरी, 800 किलो, उस पेलोड के अंदर थोड़ी जगह छोड़कर समाती हैं; 17वीं बोरी गाड़ी को उसकी अपनी रेटेड वेट से ऊपर ले जाएगी।
गाड़ी पर क्या चढ़ता है
बोरी, बंडल और चदरा, और तीनों में क्या बदलता है
सीमेंट गिनने में सबसे आसान माल है, क्योंकि एक बोरी एक बोरी है: Jeeto Strong डीज़ल पर 16 बोरी, Bolero Pik-Up 4WD पर 20, और Jayo क्लास के ट्रक का अपना GVW एक पूरा पैलेट लोड होने देता है, इससे पहले कि गाड़ी अपनी हद के आस-पास भी पहुँचे। TMT बंडल, एंगल और चदरा इतनी सफ़ाई से नहीं गिनते, क्योंकि बंडल का वज़न डायमीटर पर टिका है और चदरे का वज़न गेज और साइज़ पर, इसलिए वे गाड़ी पर कुल वज़न से चढ़ते हैं, गिनती से नहीं।
टेम्पो एक दिन के काम भर की छोटी लिस्ट के लिए ठीक है, चंद बोरी, तार का एक बंडल, कवर ब्लॉक का एक ढेर। ट्रक एक पूरे घर के ऑर्डर के लिए ठीक है, TMT, सीमेंट और चदरा साथ, जहाँ मिला हुआ वज़न वह है जो छोटी गाड़ी एक चक्कर में नहीं ले जा सकती।
गाड़ी सिर्फ वज़न से तय नहीं होती
20 फुट की लंबाई इनमें से ज़्यादातर गाड़ियों से बड़ी है
12 मीटर का सरिया रॉड ऊपर की टेबल की हर गाड़ी की अपनी पूरी लंबाई से बड़ा है, Bolero Pik-Up 2WD की अपनी 5.219 मीटर लंबाई से दुगने से भी ज़्यादा, सिरे से सिरे तक। HMB का 20 फुट एंगल, पट्टी और स्क्वायर, यानी 6.096 मीटर, उसी पिकअप की पूरी लंबाई से भी बड़ा है, लगभग एक मीटर ज़्यादा, और टेबल की पाँचों गाड़ियों में से किसी की भी कार्गो बॉक्स इतनी लंबी नहीं कि उसमें एक पूरा टुकड़ा सीधा समा जाए।
इसलिए पूरी लंबाई का रॉड, एंगल या पाइप जिस भी गाड़ी पर चढ़े, पीछे से बाहर निकला हुआ जाता है, बँधा हुआ, टेम्पो पर भी उतना ही जितना ट्रक पर। कौन सी गाड़ी किसी माल के लिए चाहिए यह अक्सर वज़न पर टिकता है, न कि इस पर कि लंबाई किसी बॉक्स के अंदर समाती है या नहीं, क्योंकि इनमें से कोई भी 20 फुट का पूरा टुकड़ा निगलने के लिए नहीं बना।
ट्रैक्टर, और वह गली जहाँ ट्रक नहीं घुसता
सँकरी गलियाँ, और गाड़ी पर चढ़ने से पहले क्या कट जाता है
ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली इस दुकान की तीसरी गाड़ी ठीक इसी वजह से है: सहरसा के पुराने मोहल्लों और सुपौल तथा मधेपुरा के गाँवों की कुछ गलियाँ इतनी सँकरी हैं कि ट्रक उनमें मुड़ ही नहीं सकता। ट्रॉली के लिए कोई बनाने वाला वह रेटेड आँकड़ा नहीं छापता जो Mahindra ऊपर Jeeto Strong या Jayo के लिए छापता है, क्योंकि ट्रॉली आमतौर पर एक अलग बनी हुई चीज़ है, कोई ऐसा आँकड़ा नहीं जिस पर ट्रैक्टर बनाने वाला खुद नंबर लगाए।
पीछे से बाहर निकला हुआ टुकड़ा किसी मोड़ पर घूमने के लिए उतनी जगह माँगता है जितनी लदी हुई ट्रक के पास ख़ुद न हो। जहाँ गली ही हद है, वज़न नहीं, वहाँ अक्सर सही तरीका यही है कि एंगल, पाइप या रॉड यार्ड से निकलने से पहले ही नाप में कटवा लिया जाए, और छोटे, हल्के टुकड़े उसी गाड़ी पर भेजे जाएँ जिसे वह गली अंदर आने देती है, बजाय इसके कि पूरी लंबाई किसी बड़ी गाड़ी पर भेजी जाए जो उस रास्ते में मुड़ ही न सके।
इस काउंटर पर
गाड़ी तय करने के लिए क्या बताना है
क्या मँगाना है और कितना, यह बताइए, और गली की चौड़ाई भी बताइए, ट्रक लायक है, सिर्फ ट्रैक्टर लायक, या सिर्फ टेम्पो लायक, ताकि जो गाड़ी भेजी जाए वही सही गाड़ी हो, वापस लौटाई जाने वाली नहीं।
हम सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के सभी 34 ब्लॉक तक अपनी गाड़ियों से पहुँचते हैं, टेम्पो से ट्रैक्टर और ट्रक तक, जितना भी माल हो उतना, उस रूट के बाज़ार भाव पर, और कौन सी गाड़ी आएगी यह उसी कॉल पर तय होता है जिस पर ऑर्डर लगता है। ऊपर इस्तेमाल हुआ 50 किलो बोरी वाला आँकड़ा कहाँ से आया, वह बरसात में सीमेंट पर है; किसी कोटेशन का दिया हुआ आँकड़ा गोदाम वाले आँकड़े से कैसे मिलाया जाए, वह कोटेशन की तुलना पर है।
स्रोत
Mahindra के अपने छपे हुए आँकड़े, जिन पर ऊपर की टेबल टिकी है
तीन पेज, एक प्रेस रिलीज़ और दो टेक्निकल स्पेसिफिकेशन शीट, उसी एक बनाने वाले से जिसके आँकड़े आज पढ़े जा सके।
- Jeeto Strong लॉन्च पर Mahindra की प्रेस रिलीज़, 815 किलो डीज़ल और 750 किलो CNG पेलोड के आँकड़ों के साथMahindra & Mahindra Ltd.
- Mahindra का Bolero Pik-Up ब्रोशर, 2WD और 4WD के GVW, कर्ब वेट और कार्गो बॉक्स नाप के साथMahindra & Mahindra Ltd.
- Jayo के लिए Mahindra Truck and Bus का टेक्निकल स्पेसिफिकेशन पेज, उसके GVW और लोड बॉडी नाप के साथMahindra Truck and Bus
सवाल
टेम्पो, ट्रैक्टर और ट्रक के सवाल
छोटा हाथी में कितना सीमेंट आता है?
टेम्पो क्लास के लोडर का अपना रेटेड पेलोड ही तय करता है, कोई अंदाज़ा नहीं। Mahindra Jeeto Strong डीज़ल अपने बनाने वाले के हिसाब से 815 किलो पर रेटेड है, यानी 50 किलो के 16 सीमेंट बोरी, थोड़ा पेलोड बचाकर; CNG वाला 750 किलो पर रेटेड है, ठीक 15 बोरी। +91 6202 967 218 पर गिनती बताइए, गाड़ी उसी कॉल पर तय हो जाएगी।
एक पिकअप में कितनी बोरी आ जाएगी?
Bolero क्लास के पिकअप का पेलोड 4WD पर 1010 किलो और 2WD पर लगभग 1280 किलो चलता है, Mahindra के अपने छपे वज़न पर, यानी 50 किलो की 20 और 25 बोरी। पूरे घर के ऑर्डर के लिए आमतौर पर बड़ी गाड़ी ही जाती है, क्योंकि TMT और चदरा सीमेंट के साथ ही चढ़ते हैं।
ट्रक और टेम्पो में फर्क सिर्फ साइज़ का है क्या?
नहीं। असली फर्क GVW का है, गाड़ी का अपना वज़न और उस पर पूरा लोड मिलाकर: टेम्पो क्लास के लोडर की रेटिंग 2 टन से नीचे बैठती है, पिकअप की लगभग 2.7 से 3 टन, और Jayo क्लास के ट्रक का अपना GVW लगभग 5 टन तक जाता है। किसी काम के लिए कौन सी क्लास चाहिए यह ऑर्डर के कुल वज़न पर टिकता है, गाड़ी कैसी दिखती है उस पर नहीं।
12 मीटर का सरिया रॉड किसी भी गाड़ी में सीधा आ जाएगा क्या?
इस व्यापार की कोई गाड़ी 12 मीटर का रॉड या 20 फुट का एंगल अपने लोड बॉडी के अंदर सीधा नहीं ले जाती; हर एक उससे छोटी है। लंबाई पीछे से बाहर निकली हुई जाती है, बँधी हुई, टेम्पो पर भी उतना ही जितना ट्रक पर, इसलिए गाड़ी उसकी वज़न रेटिंग पर चुनी जाती है, इस पर नहीं कि लंबाई किसी बॉक्स के अंदर समाती है या नहीं।
ट्रैक्टर ट्रॉली में कितना वज़न आता है?
कोई बनाने वाला ट्रॉली का वह रेटेड आँकड़ा नहीं छापता जो Mahindra टेम्पो या ट्रक के लिए छापता है, क्योंकि ट्रॉली आमतौर पर एक अलग बना हुआ सामान है, कोई ऐसा नंबर नहीं जिस पर ट्रैक्टर बनाने वाला खुद मुहर लगाए। ट्रैक्टर इस दुकान की तीसरी गाड़ी है उन गलियों के लिए जहाँ ट्रक मुड़ नहीं सकता, और कोई खास ट्रॉली कितना ले जाएगी यह फोन पर तय होता है, किसी छपी हुई टेबल से नहीं।
गाड़ी बुक करने से पहले
टेम्पो, ट्रैक्टर या ट्रक, इस लोड के लिए
हर एक वह चीज़ तय करता है जो ऊपर की वज़न वाली टेबल अकेले नहीं कर सकती।
कितना माल और कौन सा, एक चक्कर में?
मिला हुआ वज़न ही सबसे पहले क्लास तय करता है; पूरा ऑर्डर बताइए, सिर्फ आज का टुकड़ा नहीं।
गली कितनी चौड़ी है, ट्रक घुसेगा या सिर्फ टेम्पो?
जो ट्रक गली में मुड़ नहीं सकता वह वापस लौटता है, इसलिए यही तय करता है टेम्पो, ट्रैक्टर या ट्रक, गाड़ी निकलने से पहले।
पूरी लंबाई चाहिए या नाप में कटवाकर भेजनी है?
पीछे से बाहर निकला हुआ रॉड या एंगल किसी मोड़ पर घूमने के लिए उतनी जगह माँगता है जितनी लदी गाड़ी के पास सँकरी गली में न हो।
एक ही चक्कर में सब कुछ, या दो चक्कर ठीक हैं?
तंग गली में छोटी गाड़ी कभी-कभी एक बड़े लोड की जगह दो चक्कर माँगती है।
किस दिन, और अंदर तक का रास्ता कैसा है, कच्चा या पक्का?
रूट की अपनी सतह भी तय करती है कि असल में कौन सी गाड़ी जाएगी, और किराया उसी रूट के बाज़ार भाव पर लगता है।
संपर्क
गली बताइए, सही गाड़ी आएगी
टेम्पो, ट्रैक्टर या ट्रक, तीनों हमारी अपनी गाड़ियाँ हैं, जितना भी माल हो उतना, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के सभी 34 ब्लॉक तक, उस रूट के बाज़ार भाव पर। +91 6202 967 218 पर बताइए क्या मँगाना है और गली असल में कितनी चौड़ी है, और यहाँ से जो गाड़ी निकलेगी वह वही होगी जो वज़न भी उठा सके और उस रास्ते में मुड़ भी सके।
खुलने का समय: सातों दिन, सुबह 9:30 से शाम 6:00 बजे तक